China Cycle | चीन की साइकिल, भारत की मिस्त्री | China’s bicycle, India’s repairman

China Cycle | मेरे एक व्यापारी मित्र चीन गए थे तब वहां से मेरे बेटे के लिए यह बेहद शानदार फोल्डिंग साइकिल लाए थे, जो फोल्ड होकर छोटे से बैग में आ जाती है और इतनी मजबूत है कि मैं भी इसे कभी-कभी चलाता हूं।

एक दिन इसमें कुछ खराबी आ गई थी। इसका चैन सिस्टम फंस रहा था। तब मैं अपने बिल्डिंग के आसपास 4–5 साइकिल वालों के पास इसे रिपेयर के लिए ले गया। तब सब ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि अहमदाबाद के पांचकुंआ में जो साइकिल मार्केट है वहां तमाम साइकिल रिपेयर करने वाले बैठते हैं आप वहां जाकर रिपेयर करवाइए क्योंकि वह सब इंपोर्टेड साइकिल के जानकार होते हैं।

फिर मैं पिछले रविवार को यह साइकिल लेकर उस मार्केट में गया और वहां जितने भी साइकिल रिपेयर करने वाले थे सबके नाम अरमान भाई, आसिफ भाई, जावेद भाई, नावेद भाई यानी सब के सब भाई जान ही थे…

सब के सब फुटपाथ पर प्लास्टिक की सीट बिछाकर अपनी दुकान जमाए थे और पास में सिर्फ साइकिल रिपेयर करने के औजार होते थे जो भी पार्ट्स की जरूरत होती थी वहां की दुकानों से उनका आदमी लेकर आता था और साइकिल में लगाता था और हर दुकानों में उनके आठ आठ या दस दस रिश्तेदार काम करते थे क्योंकि आपस में चाचा जान तो मामू करके बुला रहे थे।

मैंने सोचा इतना बड़ा मार्केट है साइकिल की सैकड़ों दुकानें है तो कोई ना कोई हिंदू भी रिपेयर करने वाला होगा। फिर मैं एक ऐसे साइकिल की दुकान में गया जो हिंदू की थी। उसको मैंने धीरे से पूछा कि भाई साहब यहां कोई हिंदू रिपेयरिंग करने वाला नहीं है क्या ?

तब वह हंसने लगे और बोले हिंदुओं को या तो बड़ा सेठ बनना है या बड़ा अधिकारी बनना है यहां पूरे मार्केट में रिपेयरिंग के कारीगर एक भी हिंदू नहीं है।

फिर मैं मजबूरी में एक मुस्लिम कारीगर के पास गया। उसे साइकिल दिखाया भाई जान ने साइकिल पर सरसरी निगाह डाली, थोड़ा बहुत इधर – उधर घुमाया, पेडल घुमाया और बोले ठीक हो जाएगा अभी आप यहीं रख कर जाइए क्योंकि मेरे पास बहुत काम है मेरा कार्ड ले जाइए रात को 9:00 बजे आ जाइएगा और कुल ₹300 लगेंगे और सच में उसके पास फुर्सत नहीं थी क्योंकि लगातार रिपेयरिंग कराने के लिए लोग आ रहे थे।

मैंने बारगेन किया की ₹300 तो ज्यादा है तब उसने मेरे हाथ से अपना कार्ड छीन लिया और बोला किसी और जगह चले जाइए दूसरी जगह गया तो उसने ₹400 बोले उसी दुकान पर सेना के कुछ जवान अपनी साइकिल रिपेयर करवा रहे थे जो शायद इंजीनियरिंग कोर से थे।

उन्होंने मुझे साइड में बुलाया मेरी साईकिल देखी और कहा यह आपके साइकिल में जो नट बोल्ट हैं इसमें एक विशेष तरह का पाना (रिंच) लगता है आप किसी टूल की दुकान में जाइए और इस बोल्ट में लगने वाला पाना खरीद लीजिए और इस चैन सिस्टम के कवर को आप खुद अपने हाथों से खोलिए या तो इसकी चैन उतर गई होगी या फिर चेन में ऑयलिंग करना पड़ेगा आप इसे अपने हाथ से भी कर सकते है।

फिर मैं एक दुकान पर गया साइकिल के नट बोल्ट खोलने वाला एक विशेष तरह का पाना ₹50 में खरीदा घर पर आया पूरे चैन कवर को खोला चेन उतरी थी चैन को चढ़ाया बढ़िया से गिरीश किया और यह साइकिल एकदम चकाचक बन गई।

मेरे इस लंबी पोस्ट का यह मतलब है की कभी आप ने मुसलमानों को रोजगार के लिए धरना प्रदर्शन करते करते रेलवे ट्रैक पर टायर जलाकर नहीं देखा होगा। और मैंने वहां खड़े हर एक साइकिल रिपेयर करने वाले की आमदनी का मन ही मन हिसाब कर लिया। यह लोग हर रोज कम से कम ₹10000 कमाते होंगे क्योंकि ज्यादातर रिपेयरिंग में सिर्फ कौशल की बात होती है। स्पेयर पार्ट यह लोग दुकानों से सस्ते में लेते हैं। स्पेयर पार्ट में भी कमाते हैं। रिपेयरिंग में भी कमाते हैं और इन्हें न बिजली का बिल देना होता है। ना दुकान का किराया क्योंकि एक फुटपाथ पर चादर बिछा कर बैठे हैं।

साभार– सोसल मीडिया

Author: thenewszon

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