Valmiki Jayanti in Hindi | वाल्‍मीकि जयंती | Valmiki Jayanti Kab Hai, Kyu Manaya Jata Hai, Importance & History :- तो मित्रो आज मैं आपको इस आर्टिकल में बताने वाला हूं की वाल्‍मीकि जयंती कब मनाई और क्यों मनाई जाती है। इसी के साथ इससे जुड़ी जानकारी भी मैं आपके इस आर्टिकल में शेयर करने वाला हूं। महर्षि वाल्मीकि सनातन धर्म के प्रमुख ऋषियों में से एक है संस्कृत के आदिकवि महर्षि वाल्‍मीकि जी हैं। उनका जन्म आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। हर वर्ष आश्विन पूर्णिमा के दिन वाल्‍मीकि जयंती मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों ने महर्षि वाल्‍मीकि की विशेष पूजा अर्चना की जाती है और जगत के कल्याण की कामना की जाती है। महर्षि वाल्‍मीकि ने सबसे पहले संस्कृत के श्लोक की रचना की थी और उन्होंने संस्कृत रामायण महाकाव्य की भी रचना की थी, इस वजह से उनको संस्कृत के आदिकवि की उपाधि प्राप्त है।

आइए जानते हैं कि इस वर्ष वाल्‍मीकि जयंती कब है, पूजा का मुहूर्त क्या है?संस्कृत के आदिकवि महर्षि वाल्‍मीकि जी हैं। उनका जन्म आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। हर वर्ष आश्विन पूर्णिमा के दिन वाल्‍मीकि जयंती मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों ने महर्षि वाल्‍मीकि की विशेष पूजा की जाती है और जगत के कल्याण की कामना की जाती है। महर्षि वाल्‍मीकि ने सबसे पहले संस्कृत के श्लोक की रचना की थी और उन्होंने संस्कृत रामायण महाकाव्य की भी रचना की थी, इस वजह से उनको संस्कृत के आदिकवि की उपाधि प्राप्त है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष वाल्‍मीकि जयंती कब है, पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिवस वाल्‍मीकि जयंती
संबंधित अन्य नामवाल्मीकि प्रगट दिवस
आवृत्तिवार्षिक
समय1 दिन
शुरुआत तिथिआश्विन शुक्ला पूर्णिमा
समाप्ति तिथिआश्विन शुक्ला पूर्णिमा
महीनाअक्टूबर
कारणभगवान वाल्मीकि की जयंती
उत्सव विधिव्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन, वाल्मीकि मंदिर
महत्वपूर्ण जगहवाल्मीकि मंदिर
पिछले त्यौहार31 October 2020
Valmiki Jayanti

वाल्‍मीकि जयंती 2021 तिथि | वाल्मीकि जयंती कितने तारीख की है? ( Vaal‍meeki Jayanti 2021 Tithi)

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा ति​​थि का प्रारंभ 19 अक्टूबर 202 दिन मंगलवार को शाम 07 बजकर 03 मिनट पर हो रहा है। इस तिथि का समापन 20 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को रात 08 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष वाल्‍मीकि जयंती 20 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को मनाई जाएगी।

वाल्‍मीकि जयंती 2021 मुहूर्त (Vaal‍meeki Jayanti 2021 Muhurat)

20 अक्टूबर 2021 को वाल्‍मीकि जयंती के दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक है। ऐसे में आपको पूजा के लिए राहुकाल का ध्यान रखें। राहुकाल में पूजा करना वर्जित होता है। इस दिन अमृत काल दिन में 11 बजकर 27 मिनट से दोपहर 01 बजकर 10 मिनट तक है, वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक है।

वाल्‍मीकि जयंती का महत्व (Vaal‍meeki Jayanti ka Mahatva) | Importance of Valmiki Jayanti

श्री महर्षि वाल्‍मीकि संस्कृत के आदिकवि यानी प्रथम कवि हैं। उन्होंने संस्कृत में महाकाव्य रामायण की रचना की, जिसमें 24000 श्लोक हैं। संस्कृत रामायण को वाल्‍मीकि रामायण भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार महर्षि वाल्‍मीकि नदी के किनारे क्रौंच पक्षी के जोड़े को प्रेमालाप करते देख रहे थे, तभी एक बहेलिए ने नर क्रौंच पक्षी को मार दिया, जिससे मादा पक्षी विलाप करने लगी। यह देखकर वाल्‍मीकि जी बहुत दुखी हुए। क्रोधवश उनके मुख से बहेलिए के लिए कुछ शब्द निकले, जो संस्कृत में थे।

मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम् ॥

इसका अर्थ है कि तुमने प्रेमालाप करते इस क्रौंच पक्षी की हत्या की है। तुझे कभी प्रतिष्ठा नहीं मिलेगी, तुझे भी वियोग झेलना होगा। एक तरह से वाल्‍मीकि जी ने उसे श्राप दिया। उसके बाद ही वाल्‍मीकि जी ने संस्कृत रामायण की रचना की।

क्यों पड़ा नाम वाल्मीकि-

सामान्य तौर पर महर्षि वाल्मिकि के जन्म को लेकर अलग-अलग राय हैं। लेकिन बताया जाता है कि इनका जन्म महर्षि कश्यप और देवी अदिति के नौवें पुत्र वरुण और उनकी पत्नी चर्षिणी के घर में हुआ था। कहते हैं कि महर्षि वाल्मीकि ने ही प्रथम श्लोक की रचना की थी। माना जाता है कि जब महर्षि वाल्मीकि ध्यान में मग्न थे, तब उनके शरीर में दीमक चढ़ गई थीं। लेकिन वो ध्यान में इतने मग्न थे कि उनका दीमक पर कोई ध्यान नहीं गया। बाद में ध्यान पूरी हुई तो उन्होंने दीमक साफ की। दीमक के घर को वाल्मीकि कहा जाता है। बताया जाता है कि इस घटना के बाद उनका नाम वाल्मीकि पड़ा था।

वाल्मीकि आश्रम में रही थीं माता सीता-

ये भी माना जाता है कि महर्षि वाल्‍मीकि ने ही इस दुनिया में पहले श्लोक की रचना की थी. पौराणिक आख्यानों की मानें तो जब भगवान श्रीराम ने माता सीता का त्याग कर दिया था तब माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में जाकर निवास किया था. वहीं उसी आश्रम में लव-कुश दोनों भाइयों ने जन्म लिया

कहते हैं कि वाल्मीकि जी को रत्नाकर के नाम से भी कहा जाता है। बताया जाता है कि बचपन में एक भीलनी ने उनको चुरा लिया था जिसकी वजह से उनका पालन-पोषण भील समाज में हुआ और बाद में वह डाकू बन गए।

कहते हैं कि रत्नाकर को जब ये पता चला कि वह गलत मार्ग पर हैं तो उन्होंने गलत कामों को छोड़ने का फैसला किया और नया रास्ता अपनाने का मन बना लिया। इसकी सलाह उन्होंने देवर्षि नारद जी से सलाह सी थी तब उन्होंने राम नाम का जाप करने के लिए कहा। वो प्रभु में मग्न हो एक तपस्वी के रूप में रहकर ध्यान करने लगे। बह्मा जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्होंने उन्हें ज्ञान दिया जिससे उन्हें रामायण लिखी।

महर्षि वाल्मीकि जयंती कैसै मनाई जाती है – रिवाज एवं परंपरा (How Do We Celebrate Maharshi Valmiki Jayanti – Custom and Tradition of Maharshi Valmiki Jayanti)

महर्षि वाल्मीकि जयंती के पर्व को पूरे देश भर में काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है और इस दिन कई स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। इसके साथ ही इस दिन कई जगहों पर महर्षि वाल्मीकि की मूर्तियों को सजाकर शोभा यात्रा निकालते हुए लोगों द्वारा मिठाई, फल तथा विभिन्न तरह के पकवान वितरित किये जाते है।

महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर लोगो को उनके के जीवन का ज्ञान दिया जाता है, ताकि लोग उनके जीवन से सीख लेते हुए हर तहर के बाधाओं को पार करके अपने जीवन में सत्य तथा धर्म के मार्ग रक चल सके। क्योंकि महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि तथा एक महान गुरु के रुप में भी जाना जाता है। इसलिए छात्रों तथा शिक्षकों द्वारा भी उनके इस जयंती को काफी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

महर्षि वाल्मीकि जयंती की आधुनिक परंपरा (Modern Tradition of Maharshi Valmiki Jayanti)

आज के बदलते समय मे महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाने के तरीकों में भी काफी परिवर्तन आया है। वर्तमान में इस पर्व का स्वरुप पहले के अपेक्षा और भी विस्तृत हो गया है आज के समय में लोग इस दिन महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति को सजाकर शोभा यात्रा निकालते हैं। इस पर्व का सबसे भव्य आयोजन तिरुवन्मियोर, चेन्नई में देखने को मिलता है। इस स्थान को लेकर ऐसा कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण लिखने के पश्चात अपना जीवन इसी स्थान पर व्यतीत किया था।

महर्षि वाल्मीकि की जीवन की कथा आज के युग में भी काफी महत्वपूर्ण है। उनके रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा को जेल में कैदियों को भी सुनाया जाता है। जिसके द्वारा कैदियों यह बताने का प्रयास किया जाता है कि जीवन में सही मार्ग को अपनाने के लिए कभी भी देर नही होती है और अपने प्रयासों के द्वारों हम बड़े से बड़े समस्याओं पर भी विजय प्राप्त कर सकते है। हमें उनके जीवन के इस संदेश को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने का प्रयास करना चाहिए। ताकि उनकी ही तरह अपराध तथा गलत मार्ग पर चलने वाले व्यक्तियों को जीवन में सही दिशा दी जा सके।

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5 thoughts on “Valmiki Jayanti कब है और क्यों मनाई जाती है | वाल्‍मीकि जयंती का महत्व और इतिहास

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